12/6/10

जीयो जी भर के!


जिंदगी है तो ख्वाहिशें हैं और ख्वाहिशें होती हैं हजार. कुछ होती है पूरी और कुछ रह जाते हैं ख्वाब. काश ये होता, काश वो होता. काश, ऐसा हमारे जमाने में होता. जिंदगी के उजाले में जीने के बाद कौन देखना चाहता है अंधेरी रात. लंबी उम्र की तमन्ना किसमें नही होती. सब चाहते हैं कि वक्त गुजरता रहे लेकिन उम्र थम सी जाए. उम्र के हर पड़ाव पर दिल धडक़ता रहे, मचलता रहे, बहकता रहे, कभी बच्चों की तरह कभी युवाओं की तरह. साइंस ने हमारी कितनी ही ख्वाहिशें पूरी की हैं. इसकी बदौलत हम चांद-सितारों तक पहुंचने में कामयाब हुए. तो फिक्र मत कीजिए, साइंस अब हम सब को चिंरजीवी बनाने में जुटा है. आज इसी पर थोड़ी गम-शप हो जाए.
आपको मिलवाते हैं एक खास तरह के ‘एडिक्ट’ से. इनका नाम है प्रवीण साह. जैसे कोई अल्कोहलिक होता और कोई वर्कोहलिक, उसी तरह प्रवीण ‘सा’ साइंसकोहलिक हैं. यानी जो सांइटिफिकली प्रूव किया जा सके वो सच, बाकी सब झूठ. जो तर्कसंगत है वही सच है. इनके ब्लॉग का नाम है ‘सुनिए मेरी भी’. प्रवीण कहते भी हैं कि सुनिए सब की लेकिन विश्वास उसी पर करएि जो साइंस कहे. अपनी ताजा पोस्ट ‘ फिकर नॉट! अब आप रहेंगे ‘जवान’ हमेशा-हमेशा...पर, बच के रहना इस बंदूक से... प्रवीण लिखते हैं- मेरे चिर-यौवन-आकांक्षी मित्रों, एक बड़ी अच्छी खबर है. संभावना व्यक्त की गई है कि अगले दस सालों में ऐसी दवा खोजी जा सकती है जो एजिंग को रोक ही नहीं बल्कि रिवर्स भी कर सके. अब देखिए कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है विज्ञान...क्लोनिंग, स्टेम सेल रिसर्च से खुलती अपार सं भावनाएं, अॅार्गन हारर्वेस्टिंग, टिशू कल्चर, एंटी एजिंग रिसर्च, जीन मैपिंग, जेनेटिक इंजीनियरिंग एक तरफ, दूसरी तरफ यह सभावना भी कि शीघ्र ही मानव मस्तिष्क की सारी इंफारमेशन (एक्सपीरिएंस, रिफ्लेक्सेस, लर्निंग एंड बिहेवियर पैटर्न को) नैनो चिप्स में स्टोर व ट्रांसफर किया जा सकेगा...यानी साफ साफ संकेत हैं कि अमरत्व अब दूर नहीं. आंखें बंद कर सोचिए कि किस तरह का होगा मानव समाज आज से डेढ़-दो सौ साल बाद का.
अब इसी समय एक खबर.. यह भी है..एक्सएम 25 राइफल या यों कहें कि वेपन सिस्टम के बारे में. किसी भी युद्ध में होता क्या है कि योद्धा दीवार, मिट्टïी का टीले या सैंड बैग के पीछे ‘कवर’ लेता है, थोड़ी सी देर के लिए अपना सिर उठाता हैऔर विरोधी पर फायर करता है. यह राइफल सामान्य लड़ाई में कवर लेने को एकदम बेमानी कर देगी..इसको चलाने वाला अपने विरोधी को हर आड़ के पीछे मार सकता है. यानी अब हो गई अफगानिस्तान में तालिबानियों की छुट्टïी. मैं तो आज दिन भर यही सोचूंगा कि मानव जाति पहले क्या पाएगी, कहां पहुंचेगी? अमरत्व या महाविनाश. praveenshah.blogspot.com/2010/12/blog-post_03.html पर क्लिक कर आप भी सोचिए न...

4 comments:

  1. जब अमरत्व मिल जायेगा तो तालिबान को भी अमरत्व मिल जायेगा! :-(

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  2. प्रवीण शाह जी का वैज्ञानिक दृष्टिकोण ध्रुवीय है।

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    प्रिय राजीव जी,

    आपने मेरा जिक्र किया इसके लिये आभार,

    "जो तर्कसंगत है वही सच होना/माना जाना चाहिये।"... यह मेरा विश्वास है...

    इसी दॄष्टिकोण के साथ कभी-कभी कुछ लिख देता हूँ ब्लॉग पर... पर यह जरूर कहूँगा कि मुझे कभी भी यह गुमान नहीं रहा कि 'मैं ही सही हूँ', और न ही कभी मैंने इस तरह का दावा किया है ... मैं तो पाठक के सामने अपनी बात रख उसके निर्णय का इंतजार करता हूँ...

    आपका साथ बना रहेगा, इसी आशा के साथ...



    ...

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