12/24/09

हम सब में है एक मंजुनाथ



खबर आई है कि मंजुनाथ पर फिल्म बनेगी. आजकल के यंगस्टर्स मंजुनाथ की तरह ही हैं. हंसमुख, फिल्मी गाना गुनगुनाते अपने में ही मगन. मंजुनाथ जब आईआईएम लखनऊ में थे तो उन्होंने अपना एक रॉकबैंड ग्रुप बनाया था नाम था 3.4 केएम. क्योंकि मेन रोड से आईआईएम की दूरी इतनी ही थी. यही पैशन अब युवाओं के सर चढ़ बोल रहा है.
दो दिन पहले एक सर्वे आया था. यह दख कर सुखद आश्चर्य हुआ कि चीन की तुलना में भारत कहीं ज्यादा यंग है. इंडिया का यूथ ड्रीमिंग, डेयरिंग, क्रिएटिव और कांशियस है. यंगस्टर्स का नजरिया अपने भविष्य को लेकर साफ है. आज का यूथ केवल सपना ही नही देखता है, उसे पूरा करने के लिए जोखिम उठाने को भी तैयार है. उसे पता है कि यंग होने का मतलब कम उम्र का होना ही नहीं, नया सोचना भी है. तभी तो उसने आपने रोल मॉडल्स में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अमिताभ बच्चन से ऊपर रखा है. डॉ. कलाम यूं ही नहीं 2020 तक एक बेहतर भारत का सपना देखते हैं. संयोग से हाल ही में डॉ. कलाम लखनऊ में थे. उनका जोर यंगस्टर्स को सही दिशा देने पर था. उन्होंने एक बार फिर युवाओं को उनकी ताकत का एहसास कराया. चार महीने पहले भी उन्होंने यही बात कही थी कि हम अपनी ताकत को समझें, अपनी पहचान बनाएं. हम क्या ऐसा नया करें जिससे लोग हमें याद करें. इसी विजन ने डॉ. कलाम को बुलंदियों पर पहुंचाया और मिसाइलमैन की पारखी नजर अगर यंगसटर्स में 2020 के वल्र्ड चैम्पियन्स देख रही है तो इसमें गलत क्या है.
एक और बात. मंजुनाथ षणमुगम पर फीचर फिल्म बनाई जाएगी. सवाल उठता है मंजुनाथ ही क्यों? दरअसल आज हर संजीदा यंगस्टर में एक मंजुनाथ सांस लेता है. देखने में सीधासाधा, जॉली और बात-बात पर फिल्मी गाना गुनगुनाने वाला लेकिन करप्शन और अन्याय के खिलाफ लड़ाई में जान की बाजी तक लगा देने वाला. डॉ. कलाम ने युवाओं की आखों में यही तूफान देखा है. तभी तो वो कहते हैं 2020 हमारा है.
अगली कड़ी में डा. कलाम और अनुष्का.

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