10/17/13

बत्ती बना लो ...!


...हमरी न मानो रंगरेजवा से पूछो ... जिसने गुलाबी रंग दीना दुपट्टा मेरा..जी हाँ जब फिल्म पाकीज़ा बनी थी तो रंगरेज दुपट्टे गुलाबी कर दिया करते थे, तब गाल और चेहरे भी शर्म से लाल हो जाया करते थे लेकिन आजकल रंगरेज नहीं रंगबाजों का जमाना है . जो जहाँ, जब, जिसकी चाहें उसकी लाल कर दें. लॉ एंड आर्डर की भी लाल करने में वो परहेज नहीं करते क्यूंकि वो लालबत्ती वालों के लाल हैं. अब आप पूछेंगे ये लालबत्ती वाले कौन हैं? ये लालबत्ती वाले वो लोग हैं जो डिजर्व नहीं करते फिर भी लाल बत्ती लगा कर घूमते हैं और लॉ की बात करने पर क्रोध से लाल हो जाते हैं और नियम-कानून की बात करने वालों की लाल कर कर देते हैं. वैसे ये लॉ एंड आर्डर के लूज होते करेक्टर की ही अवैध संताने हैं. ये हैं अवैध रूप से लालबत्ती लगाकर सडकों पर घूमने वाले रंगबाज. लालबत्ती के फ़्लैश के साथ इनकी गाड़ियों में हूटर भी बजता रहता है जो चीख चीख कर निरीह आम जनता को आगाह करता रहता है – लाल बत्ती लगा लो, लॉ एंड आर्डर की बत्ती बना लो.
   कितना क्यूट सा शब्द है ‘बत्ती’ लेकिन इसकी मारक क्षमता बहुत घातक है. आप किसी से कह कर तो देखिये ‘बत्ती’ बना लो. वो इसे भीतर तक महसूस करेगा, तिलमिला जाएगा. शर्त लगा लीजिये, वो पलट के जवाब जरूर देगा. वैसे ‘बत्ती’ शब्द बहुत पुराना है. स्कूलों में बच्चे स्लेट-बत्ती लेकर ए बी सी डी सीखते थे. हमारी कोशिश होती थी की स्लेट पर बत्ती टूटे ना. दिमाग में भी बत्ती होती है जो कभी जल जाती है और कभी गुल हो जाती है. पहले पंसारी के यहाँ स्लेट वाली बत्ती के आलावा एक ‘बत्ती’ और मिलती थी. मुझे लगता है आजकल ‘बत्ती बना लो’ का जो जुमला लोकप्रिय है उसका ओरिजिन वही ‘बत्ती’ है. उस ‘बत्ती’ का इस्तेमाल एक जगह और होता था. ये बत्ती भी पंसारी के यहाँ बड़े सस्ते में मिलती थी और बच्चों को कांस्टेपेशन की समस्या होने पर यदाकदा इसका प्रयोग किया जादा था. लेकिन आजकल ये बच्चों की चीज नहीं रह गयी. बड़े लोग बात बात पर ‘बत्ती’ बना रहे हैं. इसका प्रयोग मास स्केल पर किया जा रहा है. लेकिन ध्यान रहे, आप दूसरों की क्षमता आक कर ही उसे ‘बत्ती’ बनाने को कहें नहीं तो अपनी ‘बत्ती’ का प्रयोग खुद ही करना पड सकता है. सो प्लीज हैंडल योर ‘बत्ती’ विथ केयर. 
  लेकिन अब उन बत्तियों से ज्यादा जलवा लाल बत्ती का है. चौराहे पर लाल बत्ती ? नो टेंशन , अपनी गाडी में लाल बत्ती लगा लो और ट्रैफिक सिपाही से कहो- अपने सिग्नल की ‘बत्ती’ बना लो.  और कहीं इन लाला बत्ती वाले  रंगबाजों की गाडी रोक कर ट्राफिक पुलिस ने चालान की पर्ची काटने की कोशिश की तो वो तमंचे की स्टाइल में अपना मोबाइल निकाल कर कॉल दागेगा - लो बात करो...बात करने के बाद सिपाही बोलेगा जी सर...और लाल बत्ती वाला रंगबाज टेढ़ा होकर गाड़ी स्टार्ट करेगा, सिपाही की चालान बुक को कुछ इस अंदाज़ में घूरेगा जैसे कह रहा हो...इसकी बत्ती बना लो...

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