12/9/09

ब्लॉगर्स नैनो मीट



आज कल ब्लॉगर्स मीट का फैशन सा चल पड़ा है. तीन-चार ब्लॉगर्स एकजगह जमा हुए और हो गई मीट. कॉफीहाउस, होटल किसी के घर की बैठक, चौपाल, खटाल, कहीं भी हो सकती है ब्लागर्स मीट. पिछले हफ्ते ऐसी ही एक मीट हमारे यहां भी हुई. सुना है कि छह-सात लोगों की दो-तीन घंटे चकल्लस को संक्षिप्त मीट कहते हैं तो तीन लोगों की एक घंटे की गप को अति संक्षिप्त मीट. एक नैनो मीट का भागीदार पिछले संडे को मैं भी बना.
सोचा नहीं था कि ब्लॉग पर बतकही करने वाले घर पर भी आ धमकेंगे. पहले कभी न देखा ना मिला, लेकिन सुबह सुबह पहुंच गए. नेट पर एक हैट लगाए रहता है और दूसरा बहुरूपिया है. अपनी तस्वीर की जगह कभी गोभी तो कभी कनैल का पेड़ टांग देता है. हैट वाला तो सातै बजे आने को तैयार था. टिका तो फाइव स्टार होटल में था लेकिन कास्ट कटिंग के चक्कर में बिना चाय पिए चला आया. दूसरका भी छुच्छै चला आया था. उसने बिना चाह पानी किए आने के कई कारण बिना पूछे ही बता दिए. हैट वाले को मैंने ही सजेस्ट किया था कि शहर में नए हो आटो वाले ठग लेंगे इस लिए कनैल वाले के साथ आओ. उसके पास कार है इसका पता एक दिन पहले ही चला था जब फ्री के चक्कर में ओस में बैठ कर सूफी संगीत सुनने लखनऊ विश्वविद्याल कैंपस चले आए थे महराज. तब उनसे पहली बार मुलाकात हुई थी. लंठ इतने बड़े कि पूरा यूपी घूम लिया है लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय का रास्ता नहीं जानते. हैट वाला अपनी टोपी पुणे में छोड़ कानपुर आईआईटी गया था स्टूडेंट को टोपी पहनाने. लौटते समय मिलने का मौका मिल गया.
संडे को मेरी छुट्टी नहीं होती है सो किसी तरह सुबह एक घंटा मैनेज किया. आठ बजे के बाद मेरे घर में मिलना तय हुआ. सवा आठ के करीब फोन की घंटी बजी और नीचे ट्रैक्टर जैसी आवाज सुनाई दी. नीचे एक कार आगे-पीछे हो रही थी. लंठाधिराज को एक बार फिर फोन पर घर का पता बताया. हम तीनों गर्म जोशी से मिले. जैसा कि तय था चाय बनने लगी. पत्नी को न जाने क्या सूझा , गोभी के पकौड़े भी बना दिए. कुछ अमरूद भी बचे थे सो काट कर रख दिए गए. बात चल निकली, वही सब जो ब्लॉगर्स बतियाते हैं. पकौड़ी की पहली खेप ठीक ठाक मात्रा में थी और गर्म थी, सो सब चट कर गए. आदतन मैंने कहा और लाओ. लेकिन किचेन में तो मैदान साफ. अंदर जा कर मैं फुसफुसाया क्या करती हो, बेज्जती कराओगी.
लौट कर मैने उन्हें बातों में ऐसा उलझाया कि पकौड़े का ध्यान ही नहीं रहा. आधा घंटा बीत चुका था. अब तक पत्नी ने फटा फट सिंघड़े काट कर तल दिए थे. मैंने पूछा काफी चलेगी? दोनों पहली बार में ही तैयार हो गए. मैंने विजयी भाव से कहा सिंघाड़े खाते हैं, दोनों ने दांत दिखा दिए. सो सिंघाड़े भी आ गए. फिर पता ही नही चला एक घंटा कैसे बीत गया. हैट वाले के दोस्त का फोन आ रहा था और मेरे आफिस का भी वक्त हो चला था. मुझे लगा कि हम पहली बार नहीं मिल रहे. जैसे समझा था दोनो वैसे ही निकले शरीफ, सरल बहुत कुछ आम भारतीयों जैसे. एक का नाम था अभिषेक ओझा और दूसरे का नाम गिरिजेश राव. तो ये थी ब्लागर्स की नैनो मीट.

18 comments:

  1. दूसरा बहुरूपिया है. अपनी तस्वीर की जगह कभी गोभी तो कभी कनैल का पेड़ टांग देता है.

    अरे नहीं महराज आज कल परमोसन हुआ है...कौनो मूर्ति का सूरत चिपका दिए हैं अब तो...
    बाकि आपका का इ मीट बहुते मीठ लगा है...
    बधाई...दे रहे हैं..रख लीजिये..!

    ReplyDelete
  2. राजीव भाई,
    दिल जीत लिया आपकी इस पोस्ट ने। वैसे तो जो भी लिखते हैं, पसंद आता है क्योंकि आपको लेखन सिद्ध है। पर इस मीट का स्वाद उत्तम था। हैटवाला और बहुरूपिया अपने भी खास हैं। हिन्दुस्तानी न होंगे तो और कौन होंगे?
    आभार

    ReplyDelete
  3. राजीव भाई,
    आजकल दिल्ली और नोएडा में कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए होटलों की कमी को देखते हुए घरों को न्यौता देते
    हुए स्कीम शुरू की गई है...बेड एंड ब्रेकफॉस्ट...इसमें होटल की तरह पैसों को भुगतान लेकर कोई भी आगंतुक
    को अपने यहां ठहरा सकता है...

    आपकी पोस्ट पढ़ने के बाद लगता है कि घुमक्कड़ी ब्लॉगर्स के लिए भी ब्लॉगर एंड ब्रेकफास्ट स्कीम शुरू कर देनी
    चाहिए...

    जय हिंद...

    ReplyDelete
  4. पोल खोलती पोस्ट।
    :)
    कार की सर्विसिंग ड्यू हो गई है।
    कंजूसी कर गए महराज। जो बातें हुईं वो भी बतानी थीं। लखनऊ के ब्लॉगरों का इम्प्रेसन सँवरता ;)

    ReplyDelete
  5. सही लिखा गिरिजेश जी ने -पोल खोलती पोस्ट!!
    कंजूसी तो की है राजीव जी ने :-)

    लखनऊ के ब्लॉगरों का इम्प्रेशन बढ़िया ही है अभी तक
    वैसे नैनों मीट बढ़िया रही। कुछ और स्वादिष्ट मीट की चाह्त है।

    बी एस पाबला

    ReplyDelete
  6. @गिरिजेश जी:
    गिरिजेश जी ब्लॉग पर क्या बाते हुईं ये तो मैंने जानबूझ कर आप पर छोड़ रखा है. बौद्धिक देने का मौका सबको मिलना चाहिए.
    @अदा जी: अदा जी माफ कीजिएगा मूर्तिवाला नया रूप मैं नहीं देख पाया था. इसी लिए तो कहता हूं बहुरूपिया. वैसे असली फोटो में भी उसके मुंह, कान, नेकुरा दुरुस्त हैं. स्मार्ट हैं

    ReplyDelete
  7. इत्ते बड़े ब्लॉगर्स से मिलेंगे तो पकोड़े सकोड़े सब कम पड़ना ही है... :)

    ReplyDelete
  8. बहुत बढ़िया पोस्ट.
    @ गिरिजेश राव जी,
    लखनऊ के ब्लॉगर भाइयों/जीजों (सही है क्या? जीजों होता है?) के इम्प्रेशन बड़े गहरे हैं. संवरे हुए हैं. पहले से ही.

    ReplyDelete
  9. honi ko koun taal saktaa he, bade bade blogers he, milate rahiye aour khaate peete rahiye.

    ReplyDelete
  10. मीट? राम राम ये क्या कह दिया आपने. अरे भेंट मुलाकात कहिये. (मुकालात नहीं:)
    और एक बात तो मैं बताना ही भूल गया. घर गए बहुत दिन हो गए और घर की पकौड़ी खा के आया आपके यहाँ से. धन्यवाद देना भूल ही गया ! और कास्ट कटिंग की बात कह के आपने हमें जो सम्मान दिया है हम गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. अब आज के जमाने में भला कंपनी के पैसे पर कास्ट कटिंग करने वाले कहाँ मिलते हैं?
    चाय पकौड़ी के साथ ठहाको की तो बात ही नहीं की आपने. नैनो कहने भर की ही थी... हम तो अभी भी याद करके मुस्कुरा लेते हैं.

    ReplyDelete
  11. matlab jis tarah pakaudi ka use blog likhne me kiya jaa raha...usse to mai sirf yahi likh sakta hoon...ke...chcha apse koi nahi bacha...haha...maza aaya post jaari rakhein...

    ReplyDelete
  12. समय से भले ही नैनो रही हो, कथ्य से तो विशाल लगती है सभा और स्वादिष्ट भी. मित्र, समय और ब्लागर्स की संख्यां से भी सभा नैनो नहीं होती, सुना है न! लोग जुड़ते रहे कारवां बनता गया. अगली सभा में हम भी आयेंगे.

    ReplyDelete
  13. Arey ojha ji .........ham to kaafi dino baad aaye......aapke blog ke to rang dhang hi badal gaye hai ......bloggers ke saath aapki meeting ka andaaz bhi accha laga.....Lagta hai aapki Mrs. pakaude bahut badiya banati hai....isi bahane.....shri mati ji ki tareef ki jaa rahi hai :-)

    ReplyDelete
  14. कमाल है, हम सोचते ही रह गए और आप इन दोनों स्टार ब्लोगरों से मिल भी लिए.

    ReplyDelete
  15. मैं भी इन्तिज़ार में हूँ कब मुझे न्योता मिलेगा

    ReplyDelete

My Blog List