हफ्ते दस दिन ठंड और रहेगी, झेल लीजिए. बिना वजह हल्ला मचा रखा है. हर साल ये होता है. चैनल वाले चीखे जा रहे हैं बर्फ दिखा-दिखा कर. कोई पांच साल, कोई 15 साल तो कोई 25 साल का हाड़तोड़ ठंड का रिकार्ड तोड़े डाल रहा है. ठंड में सब छुहारा हुए जा रहे हैं. क्रिसमस तक जब खास ठंड नही पड़ी तो लोग अधीर हुए जा रहे थे ठंड के बिना और जब ठंड पड़ रही है तो मरे जा रहे हैं पारा नापते-नापते. तुम्हारे यहां कितना, हमारे यहां इतना. ये देखो हमारा शहर शिमला से भी ठंडा और देखो पत्तों पर बर्फ जमी है. नहीं दिखी अरे छू के देखो. अरे चिल्लाने से ठंड कम तो होगी नहीं सो मजा लीजिए ठंडी का. गर्मियों में कितना भी अच्छा एसी हो, वैसी नींद नहीं आती जो छोटी सी कोठरी में अपनी रजाई में दुबक कर आती है. और एक-आध दिन नहाने से कल्टी मार जाने पर भी कोई पकड़ नहीं पाता कि पांडे जी ने आज कउआ स्नान नहीं किया है. बड़े बाबू तो कुर्ता-पजामा के ऊपर ही पैंट और जैकेट चढ़ा के आफिस चले आते हैं माजल है कोई भांप ले. ऐसी फेसेलिटी गर्मी या बरसात में मिलती है भला?
हाड़ कंपाने वाली पूस की रात कोई पहली बार तो आई नहीं है. पहले चैनल-वैनल तो थे नहीं और ना ही मौसम विभाग हर घंटे पारे का हिसाब रखता था. ब्लोअर और हीटर के बिना पूस की रातों में मड़ई या ओसारे में कौड़ा (आग) तापते लोग लंठों की तरह ठंड पर चर्चा जरूर करते थे लेकिन हल्ला नहीं मचाते थे. पूस की रात में दूर कहीं जब कानी कुकुरिया भूंकती तो हाड़ कंपाती सर्दी में मास्टर जी को मुंशी प्रेम चंद याद आने लगते और ओसारे में पड़ा बुधिया कौड़ा को पलका (भडक़ा) कर फिर गठरी बन जाता. ..और आप हैं कि जरा सी ठंड में छुहारे की इज्जत उतारने पर तुले हैं.
अरे हमने इस वीकेंड खूब फ़ोन घुमाया सुनाने के लिए की मेरे यहाँ कितनी ठण्ड है. लोगों ने ऐसा लपेटा कि मौका ही नहीं दिया कहने का. हमें भरोसा हो गया कि उत्तर भारत में कहीं अधिक ठण्ड पड़ रही है. अन्टार्क्टिका में भी क्या पड़ रही होगी ऐसी तो :)
ReplyDeleteकुर्ता के ऊपर शर्ट, केवल ऐसी ठंड में ही हिट है, नहीं तो ऐसा मजा कभी और मिलने वाला नहीं।
ReplyDelete"गर्मियों में कितना भी अच्छा एसी हो, वैसी नींद नहीं आती जो छोटी सी कोठरी में अपनी रजाई में दुबक कर आती है"
ReplyDeleteवाह वाह...सौ बातों की एक बात कह डाली है आपने...एक दम सच्ची बात...
नीरज
अब लोगों को कौन समझाए कि सरदी पड़ना भी बहुत जरूरी है!
ReplyDeleteha sir sahi kah rahay hai media walay to rai ka pahad bananay par tulay rahtay hai .thand to matra 10 15 din padtee hai aur log maja lanay kay bajay cheekhtay rahtay hai .
ReplyDeletewa wa wa wa...aakhir saari sardi utar gayi chuhare pe....mai daave ke saath kahta hoo ki aapki bhawanoo ko is post ke madhyam se sirf mai aur sirf mai he samjh sakta hoo...m i right...
ReplyDeletehahahah hahah.. tumhari bhavna ko mai bahut pahale se janta hun ;-)
ReplyDeleteकमाल करते हैं आप भी,
ReplyDeleteअगर ये सब नहीं दिखायेंगे तो खबरें कहाँ से आएँगी |
आदरणीय राजीव ओझा जी
ReplyDeleteनमस्कार !
ठंड में हुए छुहारा पढ़ कर बहुत मज़ा आया ।
…और सच कहूं तो आपके आलेख को पढ़ने के साथ ही सर्दी हमारे यहां भी कम हो गई ।
वरना माइनस 2-3 डिग्री सेल्सियस का मज़ा तो हमने भी चख ही लिया ।
आपकी अन्य पोस्ट्स भी बहुत रोचक है ।
~*~नव वर्ष २०११ के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं !~*~
शुभकामनाओं सहित
- राजेन्द्र स्वर्णकार
राजीव जी, सही कहा। वैसे अब तो धूप से कुछ राहत है।
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बोलने वाले पत्थर।
सांपों को दुध पिलाना पुण्य का काम है?
अरे
ReplyDeleteकहाँ सर्दी है जी ?
हम तो रूम के खिड़की दरवाजे बंद करके ब्लोअर चला देते हैं फिर दो ठो ऊनी बनियायिन और एक ठो जैकेट पहनकर रजाई ओढ़ लेते हैं, सर पर कनटोप बाँध लेते हैं
सर्दी का पता ही नहीं चलता ,,, आप लोग भी खामखाँ :)
very nice .... i loved reading it... but i missed thandi this year , yhan puna me thand ke naam pe full sleave shirt thi bas .... aur mere sath padhne vale south indians bechare usme bhi kampkampa rahe the ....
ReplyDeleteहर बार दुआ करता हूं कि शिमला का मजा यहीं मिल जाए भगवान कोशिश भी करते हैं लेकिन ये न्यूज चैनल वाले झूठी खबरें पहुंचाकर उन्हें ठंड वापस लेने पर विवश कर देते हैं। बहुत नाइंसाफी है
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