
अचानक मेरे एक साथी का फोन आया नए वर्ष की बधाई देने के लिए लेकिन मुझे भूत-पिशाच याद आने लगे. मेरे नाम के आगे ओझा जरूर लगा है लेकिन भूत से कोई वास्ता नहीं पड़ा है अभी तक. पता नहीं क्यों मेरे साथी अमित गुप्ता का फोन आते ही भूत याद आने लगते हैं. अमित अम्बाला के रहने वाले हैं. अभी पानीपत में एक बड़े अखबार में बड़े पद पर हैं. बात उन दिनों की है जब मैं चंडीगढ़ में था और अमित अम्बाला में हमारे अखबार के करेस्पांडेंट थे. एक दिन परेशान से अमित ने फोन किया कि सर तबियत ठीक नहीं है. पूछा, वायरल हो गया या कोई और परेशानी है? अमित ने जो कारण बताया तो परेशान होने की बारी मेरी थी. अमित ने फोन पर एक भूत से बात कर ली थी और तब से परेशान थे. अमित गंभीर किस्म के संजीदा इंसान हैं और उनसे किसी मस्खरेपन की उम्मीद नहीं की जा सकती. लेकिन उनके साथ जो कुछ हुआ, उसका कारण अमित को नहीं समझ आ रहा था.
हुआ ये कि अमित के एक साथी ने राजस्थान से लौटने पर उसे बताया कि आज कल वहां के कुछ शहरों में एक भूत का फोन चर्चा में है. उसने अमित को एक नंबर दिया और कहा कि ये भूत का नंबर है और कई लोगों ने उससे बात की है. अमित ने नंबर तो ले लिया लेकिन मजाक समझ कर इस पर ध्यान नहीं दिया. फिर शाम को अचानक उसने अपने मोबाइल से वह नंबर डॉयल किया. उधर से कोई रिस्पांस नहीं मिला.
अगले दिन सुबह करीब नौ बजे अमित ने यूं ही सोचा कि चलो पीसीओ से ट्राई करते हैं. उसने पीसीओ से नंबर घुमाया तो उधर से किसी ने कहा हैलो. अमित को लगा कि शायद रांग नंबर लग गया. 'आप कौन?' उधर से आवाज आई , यार अमित परेशान क्यों कर रहे हो. अमित के रोंगटे खड़े हो गए. उसने हिम्मत करके फिर पूछा, आप मुझे कैसे जानते हैं, अपना नाम बताइए. उधर से किसी महिला के सिसकने और बच्चे के रोने की हल्की आवाज बीच बीच में सुनाई पड़ रही थी. उधर से फिर आवाज आई कि नाम जानने से क्या होगा, तुम हमारी मदद तो कर नही सकते. अमित बोला नहीं, मैं जर्नलिस्ट हूं. तुम्हारी मदद कर सकता हूं. उसने कहा, तो मैं आ जाऊं? हां, आओ, अमित के इतना कहते ही उसे करेंट के तेज शॉक जैसा लगा और रिसीवर हाथ से छूट गया. अमित का दिल तेजी से धड़क रहा था. उसने फिर हिम्मत कर नंबर घुमाया लेकिन उधर से, दिस नंबर डज नाट एग्जिस्ट की रिकार्डेड टोन सुनाई पड़ी. उलझन और बढ़ गई जब पीसीओ वाले ने बताया कि आप की बात तो हुई है लेकिन मीटर जीरो काल बता रहा है, कोई बिलिंग नही हुई. दिन में अमित ने कई बार कोशिश की लेकिन उस नंबर से यही जवाब मिलता रहा कि दिस नंबर डज नाट एग्जिस्ट. अमित ने अगले दिन एक्चेंज से संपर्क किया तो पता चला कि ये नंबर जयपुर साइड का है पीसीओ के नबर पर कॉल का रिकार्ड नहीं है. . अमित के साथी ने जयपुर एक्चेंज से जानकारी मांगी तो बताया गया कि ये नंबर जिनका था उनकी पूरी फैमिली की एक साल पहले रोड एक्सीडेंट में डेथ हो चुकी है. अब तो अमित को बुखार चढ़ गया. दो तीन दिन बाद नार्मल होने पर अमित ने ऑफिस आकर ये दास्तान सुनाई.
फिर क्या था वो नंबर पूरे ऑफिस में बट गया. हम लोंगों ने खबर भी छापी. सब ने नंबर लगाया लेकिन रिसपांस नही मिला. मैंने तो कई बार अकेले अपने रूम में अंधेरा कर रात दो बजे फोन लगाया कि शायद भूत से बात हो जाए लेकिन नो रिसपांस.
जब भी अमित का फोन आता है तो ये घटना याद आ जाती है. सुना है ठंडी स्याह रातों में सुनसान रास्तों पर भूतों का डेरा होता. रोज रात को करीब एक बजे अकेले की लौटता हूं. रास्ते में मिलता है 200 साल पुराना एक बरगद का पेड़, ठिठुरता हुआ चौकीदार, दुकान के शेड में रिक्शे के ओट में लेटा जाड़े को कोसता रिक्शेवाला, उसके फटे कम्बल में दुबका एक पिल्ला. और एटीएम केबिन में ऊंघता गार्ड. मुझे तो नही मिले आपको भूत या चुड़ैल तो कभी मिले हों तो बताइएगा.
मुझे भी आज तक कोई भूत नहीं मिला। मिलेगा,तो जरूर बताउंगा।
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ज्योतिष के पाखंड को तार-तार करता एक ज्योतिषाचार्य।
अगर महिलाओं के दाढ़ी-मूछें उग आएं तो?
badey dino se dabaye baithe they akhir likh hi diya sir...mai isi intezar me tha...barhia hai...number maine bhi try kiya tha per nahi laga tha.
ReplyDeleteNice Story
ReplyDeleteअविश्वसनीय ...क्या सचमुच ऐसा हुआ ...?
ReplyDeleteआजकल पत्रकारों का कोई भरोसा नहीं रहा ...सनसनी फ़ैलाने में सबसे आगे रहते हैं ...:)
mujhe vishwaas hai...ki ye hua hoga..
ReplyDeleteis dunia mein kuch bhi sambhav hai..
Sir, namaskar!
ReplyDeletepurani yaad taza ho gai. apney bahut achacha likha hai. main sham ko is lekh ko pad raha hu. sar par topi hai, aur mathe par paseena. lekh padney say pehle thand lag rahi the, lekin purani baat yaad kar-k thand gayab ho gai. wo mobile number to mainey del. kar diya. lekin us mobile number ki khaas baat yai bhi the ki wo kisi bhi mobile main save nahi ho raha tha. aur sabhi pareshan the.
purani yaad taza karwaney k leyai dhanyawad.
raat ko ghar jate waqt "ALL IS WELL" kehte hue jaunga, kahi fansa to apka naam le lunga.
Amit Gupta
Great my dear 'rancho'. Dont worry AAL IZZ WELL
ReplyDeleterajiv ojha ji
ReplyDeleteye bhoot wala number
hamahu ko diya jaaye please
Govind ji ye number to Amit Gupta hi bata sakte hain :)
ReplyDeleteGovind ji, number to mainey del. kar diya tha. number milna mushkil hai.
ReplyDeleteHaan ..un dino aisa hi ek waakaya maine bhi suna tha...lekin wo number Nagpur ka tha aur fone receive karnewale ki death 6 saal pahle ho chuki thi. Iss baar navraatra mein maine bhi jo anubhav kiya wo aaj bhi mere liye paheli se kum nahi hai...
ReplyDeletechaliye is baar delete ho gaya
ReplyDeletekoyi baat nahi.
aayinda kabhi bhoot se phone ya mail dwara sampark ho to batayiyega jaroor.
VERY INTERESTING STORY SIR....
ReplyDeleteGRAPHICS BAHUT HI BADHIYA HAI....
ReplyDeleteभूत नहीं होता. यह हमारा वहम मात्र है.
ReplyDeleteआपका कॉल तो नाहीये लगेगा... बोलियेगा 'ओझा बोल रहा हूँ' तो साला भूत ऐसे ही भाग जाएगा.
ReplyDeleteअविश्वसनीय किस्सा है यह तो ! होता होगा ऐसा ।
ReplyDeleteNice Story
ReplyDeleteयह तो कुछ नही है इस से भी बड़ी बड़ी कहानियाँ आजकल पकाई जाती हैं । टीवी पर भी और न्यूस चैनल में भी ... हाहाहा ।
ReplyDeletedara rae hai kya sir aap :( ... meri waise bhi bhooto se hawa tight oti hai :(
ReplyDelete09415817683
ReplyDeleteये है उस भूत का नंबर
वाह, गजब! रस्किन बॉण्ड का ब्लॉग लगता है यह - भूतनीय रोमांच से भरा!
ReplyDeleteKya OJha ji....Sansani faila rahe hai.....sacchi media se bharosa hi uth jayega...Aapko TRP mile na mile readers to mil hi jayenge:-)
ReplyDeleteअरे क्या राजू भाई,
ReplyDeleteखामख्वाह इतना टंटा किया, किसी नेता से बात कर ली होगी...वो ज़ीरो मीटर का फंडा भी ढूंढ निकाले होंगे...
बस फोन पर इतना कह देना था...मार देब चोट्टा सारे...
जय हिंद...